अंधेरा-उजाला · ज़िन्दगी एक सफर

ज़िंदगी – अंधेरा और उजाला

अंधेरे से डर कर मैंने दोनों हाथों से अपनी आँखें मूँद लिया था.

फिर हिम्मत करके धीरे से अपनी उंगलियों के झरोखों से झांका तो देखा,

दूर कहीं एक तारा टिमटिमा रहा था,

इतने अंधेरे में भी एेसे मुस्कुरा रहा था,

काली अंधेरी रात में भी कितने शान से चमचमा रहा था,

बड़ी हैरानी हुई मुझे उसे देख कर कि ज़िन्दगी की इस रात में वो ऐसे खिलखिला रहा था.

जब हर आस टूट गयी सुबह के इंतज़ार में तो मैंने उसकी सलाह लेने का सोचा,

पर जब पास जाकर देखा तो

वो भी किसी और की रोशनी से जगमगा रहा था.

~Priyamvada
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