ज़िन्दगी एक सफर · मदारी बना ज़मूरा

एक मदारी एक जमूरा

जिसकी जैसी सीरत, दिखती ये दुनिया उसको वैसी.

एक मदारी एक ज़मूरा, रंगमंच के जैसी.

तितली कहती मैं तो बनी हूँ, फूलों पर उड़ने के लिये.

मदारी कहता है उसको, ऊँचे पहाड़ चढ़ने के लिए.

देख ज़रा उस चींटी को जो तुझसे कितनी छोटी है,

चढ़ पहाड़ को खुदसे ज्यादा वज़न वो ढोती है.

मछली कहती मैं तो बनी हूँ, पानी की दुनिया के लिए.

मालिक कहता नहीं जमूरे, तू बनी है उड़ने के लिये.

देख ज़रा वो गौरैया कैसे चहचहाती है,

पर उड़ने की जब बात है आती नील गगन उड़ जाती है.

मदारी की दुनिया में यही है सफलता की परिभाषा,

जमूरा वो ही सबसे अच्छा जो मदारी के इशारे पर हो चलता.

खो कर अपने आप को अब बस सफलता है जमूरे को पाना.

मदारी की नज़रों में उसे सबसे अच्छा है बन जाना.

पर ज़िंदगी के इस रंगमंच में जो ज़मूरा नहीं है बनता.

लिखता है एक नयी कहानी, जिसमें खुद मदारी ही जमूरा बनता.

जिसकी जैसी सीरत, दिखती ये दुनिया उसको वैसी.

एक मदारी एक ज़मूरा, रंगमंच के जैसी.

~ Priyamvada

© ALL COPYRIGHTED RESERVED

Image Source- Google

3 thoughts on “एक मदारी एक जमूरा

  1. Golden word priyamvada Ji..

    Kuch to log kahenge..
    Logo Kam hai kehna..

    Logo ki baten madari aur hum ban baithe hai Bandar .

    Madari ka Bandar banne se better gandhi Ji ka Bandar banna hai.

    Liked by 1 person

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